Satyanarayan

Sri Satyanarayana Swami Vratam (Sri Satyanarayana Puja) is a popular, and traditional ritual of Hinduism, which is performed in many Hindu households on important occasions. The ritual seemed to have gained popularity in modern times because it is considered to have a beneficial effect upon those who perform it with reverence and sincerity. According to the legends associated with the ritual, several kings and merchants used to perform it in the past to overcome adversity and earn the grace of Satyanarayana Swami, a benevolent form of Lord Vishnu.

Satyanarayana means Lord of Truth, or Narayana in truth form. Sat means both truth and existence, in contrast to asat (untruth and non-existence). Lord Narayana (literally meaning lord of nara, the pranic energy or the life sustaining astral water) is Brahman, the highest Supreme Self. As Brahman, He is both existence (sat) and non-existence (asat), also called Being and Non-Being. His purest and the highest manifestation in creation is Isvara, the Primal Being, or the Lord of the Universe, who is His reflection in the purest form of sattva (suddha sattva).

सत्य नारायण भगवान् की पूजा का हिन्दू धर्म में बहुत अधिक महत्व होता हैं | किसी भी विशेष कार्य जैसे गृह प्रवेश, संतान उत्पत्ति, मुंडन, शादी के वक्त, जन्मदिन आदि शुभ कार्यो में यह पूजा एवम कथा करायी अथवा स्वयं की जाती हैं | मनोकामना पूरी करने हेतु सत्य नारायण की कथा को कई लोग साल में कई बार विधि विधान से करवाते हैं | गरीबों एवं ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देते हैं | कई लोग मानता के स्वरूप में भी इनकी पूजा एवं कथा करते हैं और कई भगवान को धन्यवाद देने के लिए भी यह करते हैं |

सत्य नारायण की पूजा एवं कथा दोनों का ही बहुत महत्व हैं कहते हैं सुनने मात्र से पूण्य की प्राप्ति होती हैं | सत्य को मनुष्य में जगाये रखने के लिए इस पूजा का महत्व आध्यात्म में निकलता हैं | भगवान की भक्ति के कई रास्ते हैं | धार्मिक कर्म कांड अथवा मानव सेवा | पूजा पाठ में मन को लगा देने से चित्त शांत होता हैं | मन पर नियत्रण होता हैं | आज के समय में पूजा पाठ के नियम सभी को पता नहीं होते ऐसे में यह कार्य अधूरे से लगते हैं | ऐसी ही परेशानी को ध्यान में रखते हुए कथा का विस्तार एवं पूजा विधि लिखी गयी हैं |

Lord Satyanarayan Aarti

Jai Lakshmi Ramna, Swami Jai Lakshmi Ramna
Satyanarayan Swami, Jan Paatak Harna
Swami Jai Lakshmi Ramna

Ratan Jadhit Sinhaasan, Adbhut Chavi Raaje
Naarad Karat Niraajan, Ghanta Van Baaje
Swami Jai Lakshmi Ramna

Prakat Bhay Kalikaaran, Dwij Ko Daras Diyo
Budho Bramhaan Bankar, Kanchan Mahal Kiyo
Swami Jai Lakshmi Ramna

Durbal Bheel Kathoro, Jin Par Kripa Kari
Chandrachud Ek Raaja, Tinki Vipatti Hari
Swami Jai Lakshmi Ramna

Vaishya Manorath Paayo, Shradha Taj Dinhi
So Fal Bhagyo Prabhuji, Fir Stutui Kinhi
Swami Jai Lakshmi Ramna

Bhav Bhakti Ke Kaaran, Chin Chin Rup Dhrayo
Shradha Dhaaran Kinhi, Tinko Kaaj Saro
Swami Jai Lakshmi Ramna

Gwaaal- Baal Sang Raja, Ban Me Bhakti Kari
Manvaanchit Phal Dinho, Deen Dayalu Hari
Swami Jai Lakshmi Ramna

Chadat Prasad Savaayo Kadali Fal Meva
Dhup Deep Tulsi Se Raaji Satyadeva
Swami Jai Lakshmi Ramna

Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti Jo Koi Gaave
Kahat Shivanand Swami Manvaanchit Phal Paave
Swami Jai Lakshmi Ramna

श्री सत्यनारायण जी आरती

जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

रतन जड़ित सिंहासन, अदभुत छवि राजे
नारद करत नीराजन, घंटा वन बाजे
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

प्रकट भए कलिकारण, द्विज को दरस दियो
बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

दुर्बल भील कठोरो, जिन पर कृपा करी
चंद्रचूड़ एक राजा, तिनकी विपत्ति हरि
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही
सो फल भाग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति किन्ही
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

भव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो
श्रद्धा धारण किन्ही, तिनको काज सरो
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

ग्वाल-बाल संग राजा, बन में भक्ति करी
मनवांछित फल दीन्हो, दीन दयालु हरि
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

चढत प्रसाद सवायो, कदली फल मेवा
धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत्यदेवा
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावे
ऋषि-सिद्ध सुख-संपत्ति सहज रूप पावे
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा

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