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Lord Shiva

Lord Shiva

भगवान शिव

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ॐ मृत्युञ्जय महादेव त्राहि मां शरणागतम्। जन्म-मृत्यु-जरा-व्याधिपीडितं कर्मबन्धनैः॥ ॐ नमः शिवाय॥ शिव जी को महादेव कहा जाता है, यानी देवों के भी देव। वे शक्ति और शांति दोनों का संतुलित स्वरूप हैं। शिव जी का अर्थ केवल संहार नहीं है, बल्कि भीतर की नकारात्मकता, अहंकार, और अज्ञान का अंत करके नई शुरुआत का मार्ग बनाना भी है। वे हमें सिखाते हैं कि असली शक्ति वही है जो भीतर से शांत हो। शिव जी को ध्यानमग्न और तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन में भागदौड़ के बीच भी मन को स्थिर रखना जरूरी है। उनका तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक है, जो अज्ञान और अहंकार को जलाकर सत्य का मार्ग दिखाता है। उनके गले में नाग यह बताता है कि भय और विष जैसे कठिन भावों पर भी नियंत्रण संभव है। शिव जी के सिर पर गंगा का बहना बहुत सुंदर संदेश देता है। यह करुणा और शुद्धता का संकेत है। इसका अर्थ है कि चाहे जीवन में कितनी भी तीव्रता हो, उसे संयम और भक्ति से पवित्र दिशा दी जा सकती है। उनका डमरू सृजन और ऊर्जा का प्रतीक है, और त्रिशूल यह दिखाता है कि वे शरीर, मन, और आत्मा के संतुलन की रक्षा करते हैं। शिव जी की पूजा हमें भीतर से हल्का बनाती है। जब हम उन्हें याद करते हैं, तो हमें अपने दुख, क्रोध, और तनाव को छोड़ने की ताकत मिलती है। शिव जी हमें सिखाते हैं कि विनम्रता, धैर्य, और सच्चाई के साथ जीना ही सबसे बड़ा तप है।

जय शिव ओमकारा प्रभु हर शिव ओमकारा ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ॐ जय शिव ओमकारा एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे स्वामी पञ्चानन राजे हंसासन गरूड़ासन हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॐ जय शिव ओमकारा दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे स्वामी दसभुज अति सोहे तीनो रूप निरखता तीनो रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ॐ जय शिव ओमकारा अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी स्वामी मुण्डमाला धारी त्रिपुरारी कंसारी कंचन बिन मन चंगा कर माला धारी ॐ जय शिव ओमकारा श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे स्वामी बाघम्बर अंगे सनकादिक ब्रम्हादिक ब्रम्हादिक सनकादिक भूतादिक संगे ॐ जय शिव ओमकारा कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी स्वामी चक्र त्रिशूलधारी जगहर्ता जगकर्ता जगहर्ता जगकर्ता जगपालन कारी ॐ जय शिव ओमकारा ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका स्वामी जानत अविवेका प्रानवाक्षर के मध्ये ये तीनो के धार ॐ जय शिव ओमकारा त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे स्वामी जो कोइ नर गावे कहत शिवानन्द स्वामी कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे ॐ जय शिव ओमकारा