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Goddess Lakshmi

Goddess Lakshmi

माँ लक्ष्मी जी

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ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः। पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः॥ श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा। तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ माँ लक्ष्मी जी को धन, समृद्धि, और सौभाग्य की देवी कहा जाता है, लेकिन उनका अर्थ केवल पैसा नहीं है। लक्ष्मी जी का असली संदेश है संतुलित समृद्धि, जिसमें घर में शांति हो, मन में संतोष हो, रिश्तों में सम्मान हो, और जीवन में स्थिरता हो। वे हमें सिखाती हैं कि सही धन वही है जो ईमानदारी से आए और सही काम में लगे। माँ लक्ष्मी जी को कमल पर विराजमान दिखाया जाता है। कमल का अर्थ है पवित्रता और सुंदरता, जो कीचड़ में रहकर भी निर्मल रहता है। इसका संदेश यह है कि हम दुनिया के बीच रहकर भी अपने विचार और कर्म साफ रख सकते हैं। उनके हाथों से गिरते हुए स्वर्ण सिक्के यह बताते हैं कि उदारता और अच्छे कर्म से समृद्धि बढ़ती है। लक्ष्मी जी की पूजा केवल धन के लिए नहीं होती, बल्कि घर में शुभता, व्यवस्था, और सकारात्मक ऊर्जा के लिए भी होती है। वे बताती हैं कि समृद्धि वहां टिकती है जहां मेहनत, अनुशासन, स्वच्छता, और कृतज्ञता होती है। इसलिए लक्ष्मी जी की आराधना हमें अपने जीवन को व्यवस्थित और मूल्यवान बनाने की प्रेरणा देती है। जब हम माँ लक्ष्मी जी को याद करते हैं, तो हम यह भी याद करते हैं कि हमें जो मिला है उसकी कदर करें, और जो चाहिए उसके लिए सही तरीके से प्रयास करें। यही सच्ची समृद्धि है।

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। मैया तुम ही जग-माता॥ सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। मैया सुख सम्पत्ति दाता॥ जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। मैया तुम ही शुभदाता॥ कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। मैया सब सद्गुण आता॥ सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। मैया वस्त्र न कोई पाता॥ खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। मैया क्षीरोदधि-जाता॥ रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। मैया जो कोई जन गाता॥ उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥