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Lord Krishna

Lord Krishna

श्री कृष्ण जी

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ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ श्री कृष्ण जी प्रेम, बुद्धि, और धर्म के सबसे जीवंत स्वरूप हैं। वे केवल पूजनीय नहीं हैं, बल्कि जीवन को समझने वाले एक मार्गदर्शक भी हैं। कृष्ण जी हमें सिखाते हैं कि धर्म का मतलब सिर्फ नियम नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति में सही निर्णय लेना और अपने कर्म को ईमानदारी से निभाना है। कृष्ण जी का जीवन यह दिखाता है कि ईश्वर हमारे साथ अलग-अलग रूपों में चलता है। कभी वे बाल रूप में आनंद हैं, कभी मित्र रूप में सहारा हैं, और कभी गीता के उपदेश में जीवन की सबसे गहरी सीख बन जाते हैं। उनका संदेश है कि जीवन में कठिन समय आए तो घबराना नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्य पर टिके रहना है। कृष्ण जी की बांसुरी अक्सर प्रेम और आकर्षण का प्रतीक मानी जाती है। इसका अर्थ यह भी है कि जब हम अपना अहंकार कम करते हैं और भीतर से खाली होते हैं, तब दिव्यता हमारे माध्यम से मधुरता और सही दिशा पैदा कर सकती है। वे हमें सिखाते हैं कि जीवन में मुस्कान और खेल भावना जरूरी है, लेकिन जब बात धर्म की हो तो साहस भी जरूरी है। कृष्ण जी की भक्ति हमें रिश्तों में मिठास, मन में शांति, और निर्णयों में स्पष्टता देती है। वे हमें याद दिलाते हैं कि कर्म करो, लेकिन फल की चिंता में खुद को मत बाँधो। यही स्वतंत्रता और सच्ची श्रद्धा है।

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की...॥ कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं। गगन सों सुमन रासि बरसै। बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की...॥ जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा। स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की...॥ चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू। चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद, टेर सुन दीन दुखारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की...॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥