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Lord Ganesh

Lord Ganesh

श्री गणेश

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ॐ गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥ ॐ गं गणपतये नमः॥ श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी जो रुकावटों को दूर करते हैं और नए काम की शुरुआत में शुभता लाते हैं। उनकी पूजा अक्सर किसी भी नए कार्य से पहले की जाती है, क्योंकि वे बुद्धि, विवेक, और सही दिशा का प्रतीक हैं। गणेश जी का संदेश यह है कि सफलता केवल तेज़ी से नहीं आती, बल्कि समझदारी और सही निर्णयों से आती है। गणेश जी का हाथी जैसा सिर बहुत अर्थपूर्ण माना जाता है। यह हमें सिखाता है कि हमें बड़ा सोचने वाला, धैर्यवान, और सुनने वाला बनना चाहिए। उनके बड़े कान यह याद दिलाते हैं कि हम ज्यादा सुनें और सोच-समझकर बोलें। उनकी सूंड यह दिखाती है कि हम छोटे से छोटे काम को भी ध्यान से कर सकते हैं और बड़े से बड़े लक्ष्य को भी संभाल सकते हैं। उनका वाहन मूषक या चूहा है। इसका अर्थ यह है कि इच्छाओं और चंचल मन पर नियंत्रण जरूरी है। मूषक बहुत छोटा होते हुए भी हर जगह पहुंच जाता है, जैसे हमारी इच्छाएं भी चुपचाप मन में प्रवेश कर सकती हैं। गणेश जी हमें सिखाते हैं कि इच्छाओं को सही दिशा में रखकर ही हम आगे बढ़ते हैं। गणेश जी की पूजा केवल बाहरी बाधाओं के लिए नहीं होती, बल्कि भीतर की बाधाओं के लिए भी होती है, जैसे आलस्य, भ्रम, डर, और टालमटोल। जब हम गणेश जी को याद करते हैं, तो हमें अपने काम की शुरुआत साफ मन से करने की प्रेरणा मिलती है, और हम अधिक स्थिर और केंद्रित महसूस करते हैं।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा । लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ 'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥